प्राइवेटाइजेशन का सपोर्ट करने वाले लोगों के लिए दुख खबरी है.. अंबानी और अदानी के बीच No Poaching समझौता हो गया है। इसका मतलब है की अंबानी और अदानी की किसी भी कंपनी या ग्रुप ऑफ कंपनीज में काम करने वाले कर्मचारियों को दूसरे ग्रुप की कंपनी में नौकरी नहीं मिलेगी। जबकि ये दोनो ग्रुप देश के कई सेक्टर में सबसे बड़े प्लेयर हैं। मतलब अब अगर आप की सैलरी सालों तक ना बड़े, बॉस गलियां दे, आपका फ्यूचर कंपनी में खत्म हो जाए और तो झक मार के गुलामों की तरह काम करते रहो क्योंकि दूसरा ग्रुप तो नौकरी देगा ही नही। आपके भविष्य के काफी दरवाजे अब हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। ये एक तरह से कर्मचारियों को बांधने वाला गेम है। देश के टॉप 5-10 इंस्टिट्यूट को छोड़ कर लाखों कॉलेज के करोड़ों छात्र जब एमबीए , BTech करके निकलते हैं तो अनुभव के अभाव में बहुत कम तनख्वाह की नौकरी मिलती हैं। अपनी जायज सैलरी पाने के लिए हर कर्मचारी कम से कम 3 नौकरियां बदलता है। कई कंपनियां जब कर्मचारियों को आगे नहीं बढ़ाती तो लोग अच्छी तनख्वाह, अच्छी सुविधाओं या बेहतर भविष्य के लिए भी दूसरी कंपनियों में चले जाते हैं। ये उनका जन्मसि...